महादेवी वर्मा की गौरा एक मार्मिक कहानी है। एक दिन उनके घर आई उजली, शांत और सुंदर गाय गौरा। उसके भोले नेत्रों ने सबका मन जीत लिया। गौरा पुकार पहचानती और स्नेह समझती थी। जब बछड़ा लालमणि जन्मा, गौरा का मातृत्व और भी उजला हो उठा। फिर बीमारी ने उसे तोड़ दिया। उसकी शांत आँखों की पीड़ा सबको चीर गई। पशु वस्तु नहीं, संवेदनशील जीव हैं। यही गौरा का सबसे बड़ा संदेश है।